Thursday, May 30, 2013

जिंदगी

जिंदगी कहते है जीने का नाम है
पर लगता है अब अपना यहाँ क्या काम है?
दिन ऐसे गुज़रता है की ना जाने
कब सूरज आता है कब आती शाम है?

कुछ दिन ऐसे गुज़रे जैसे कोई मृत शरीर हो
जीने की लालसा ना हो, मृतु के करीब हो
जिंदगी कहते है जीने का नाम है
पर लगता है अब अपना यहा क्या काम है

कुछ रातों से न हू सोई मैं
आखें सूझ गयी है, हू इतना रोई मैं
जिंदगी कहते है जीने का नाम है
पर लगता है अब अपना यहा क्या काम है

मगर उस माँ से कैसे कहु
जिसके होठों पे अभी भी मेरा ही नाम है
जिंदगी कहते है जीने का नाम है
पर लगता है अब अपना यहाँ क्या काम है

पैदा होते हुए कष्ट दिए था एक दिन
अब मृतु की पीड़ा कैसे दे दू
जिंदगी कहते है जीने का नाम है
पर लगता है अब अपना यहाँ क्या काम है

दिल को जब टटोला एक दिन
पूछा  मैने दिल से एक दिन
क्या हमारा जीना इतना ही आम है
क्या जिंदगी बस जीने का नाम है

आवाज़ आई अंदर से
अपने वजूद के होने के संघर्ष मे
तेरा कभी ना हार मानना ही आब तेरा काम है
जिंदगी तो जीने का नाम है

संघर्ष के बाद की सफता की मिठास
उस कुछ क्षणो को खुशी के लिए जीना ही आब तेरा काम है
जिंदगी तो जीने का नाम है
हमारा यहा अभी अनको काम है

No comments:

Post a Comment