Thursday, February 21, 2013

क्या करू?


तू ही बता
अब तेरा मैं क्या करू?

तेरे होने ना होने का जो संदेह है
इसका मैं क्या करू ?

कोई पूजता है तेरे अनेको रूप
तो कोई पूजता है तेरे अंगज को

कोई सजदा करता है बस तेरे नाम का
तो कोई कहता है तू  इन्ही पन्नो मे हैं

तू ही बता
अब तेरा मैं क्या करू?

कोई कहता है तू सब देख रहा है
कोई कहता है तेरे पास सबका हिसाब है

कोई कहता है तुझसे डरने को
कोई कहता है तू माँ से भी प्यारा है

गर ये सब  सच है
तो ये लोग तेरे लिए लड़ते क्यू है?

गर ये सब सच है
तो यहाँ शांति क्यू नही

गर तू है तो बस
मंदिरो,मस्जीदो,गुरुद्वारे ओर गिरजाघरो मे क्यू?

क्या उपर जहा तू बैठा है,वहाँ भी कमरे है?
क्या मर्त्यु ही तेरी शरण मे आने का एक मात्र उपाय है?

तू है , इसका मुझे शक है
तू ना है, इसका मुझे यकीन

तू ही बता
अब तेरा मैं क्या करू?

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