उस मृगतृष्णा की तलाश मे
बैठी हू मैं ना जाने किस आस मे
एक बुझते हुए दिए के प्रकाश मे
बैठी हू मैं ना जाने किस आस मे
एक सवेरा देखने के प्रयास मे
बैठी हू मैं ना जाने किस आस मे
साथ होगा वो इस उम्मीद मे
बैठी हू मैं ना जाने की आस मे
एक सवेरा मेरा भी, एक अंधेरा मेरा भी
इसे सिद्ध करने के बस प्रयास मे
बैठी हू मैं इसी आस मे
बैठी हू मैं ना जाने किस आस मे
एक बुझते हुए दिए के प्रकाश मे
बैठी हू मैं ना जाने किस आस मे
एक सवेरा देखने के प्रयास मे
बैठी हू मैं ना जाने किस आस मे
साथ होगा वो इस उम्मीद मे
बैठी हू मैं ना जाने की आस मे
एक सवेरा मेरा भी, एक अंधेरा मेरा भी
इसे सिद्ध करने के बस प्रयास मे
बैठी हू मैं इसी आस मे