Friday, May 31, 2013

आस

उस मृगतृष्णा की तलाश मे
बैठी हू मैं ना जाने किस आस मे
एक बुझते हुए दिए के प्रकाश मे
बैठी हू मैं  ना जाने किस आस मे
एक सवेरा देखने के प्रयास मे
बैठी हू मैं ना जाने किस आस मे
साथ होगा वो इस उम्मीद मे
बैठी हू मैं ना जाने की आस मे

एक सवेरा मेरा भी, एक अंधेरा मेरा भी
इसे सिद्ध करने के बस प्रयास मे
बैठी हू मैं इसी आस मे

Thursday, May 30, 2013

बसेरा

मेरा भी है एक बसेरा
देखूँगी मैं उस गली को
जब आएगा मेरा सवेरा

वो कसमे, वो वादे, वो रिस्ते, वो नाते
निभाना है उन सभी को
जब आएगा मेरा सवेरा

त्यौहारो की हलचल,माँ का वो आँचल
घर का वो आँगन,वो सावन का बादल
वो रंगो भरा कमरा, है बस जो मेरा
वो लड़ना झगरना, वो रूठना मानना
वो साथ किसी का, वो अकेले मे मुस्कुराना
वो रातों को जागना, वो सुबह देर से उठना
वो तड़प किसी की, वो दिल का धड़कना

लौटूँगी मैं उस गली को
जब आएगा मेरा सवेरा

जिंदगी

जिंदगी कहते है जीने का नाम है
पर लगता है अब अपना यहाँ क्या काम है?
दिन ऐसे गुज़रता है की ना जाने
कब सूरज आता है कब आती शाम है?

कुछ दिन ऐसे गुज़रे जैसे कोई मृत शरीर हो
जीने की लालसा ना हो, मृतु के करीब हो
जिंदगी कहते है जीने का नाम है
पर लगता है अब अपना यहा क्या काम है

कुछ रातों से न हू सोई मैं
आखें सूझ गयी है, हू इतना रोई मैं
जिंदगी कहते है जीने का नाम है
पर लगता है अब अपना यहा क्या काम है

मगर उस माँ से कैसे कहु
जिसके होठों पे अभी भी मेरा ही नाम है
जिंदगी कहते है जीने का नाम है
पर लगता है अब अपना यहाँ क्या काम है

पैदा होते हुए कष्ट दिए था एक दिन
अब मृतु की पीड़ा कैसे दे दू
जिंदगी कहते है जीने का नाम है
पर लगता है अब अपना यहाँ क्या काम है

दिल को जब टटोला एक दिन
पूछा  मैने दिल से एक दिन
क्या हमारा जीना इतना ही आम है
क्या जिंदगी बस जीने का नाम है

आवाज़ आई अंदर से
अपने वजूद के होने के संघर्ष मे
तेरा कभी ना हार मानना ही आब तेरा काम है
जिंदगी तो जीने का नाम है

संघर्ष के बाद की सफता की मिठास
उस कुछ क्षणो को खुशी के लिए जीना ही आब तेरा काम है
जिंदगी तो जीने का नाम है
हमारा यहा अभी अनको काम है