Thursday, February 21, 2013

क्या करू?


तू ही बता
अब तेरा मैं क्या करू?

तेरे होने ना होने का जो संदेह है
इसका मैं क्या करू ?

कोई पूजता है तेरे अनेको रूप
तो कोई पूजता है तेरे अंगज को

कोई सजदा करता है बस तेरे नाम का
तो कोई कहता है तू  इन्ही पन्नो मे हैं

तू ही बता
अब तेरा मैं क्या करू?

कोई कहता है तू सब देख रहा है
कोई कहता है तेरे पास सबका हिसाब है

कोई कहता है तुझसे डरने को
कोई कहता है तू माँ से भी प्यारा है

गर ये सब  सच है
तो ये लोग तेरे लिए लड़ते क्यू है?

गर ये सब सच है
तो यहाँ शांति क्यू नही

गर तू है तो बस
मंदिरो,मस्जीदो,गुरुद्वारे ओर गिरजाघरो मे क्यू?

क्या उपर जहा तू बैठा है,वहाँ भी कमरे है?
क्या मर्त्यु ही तेरी शरण मे आने का एक मात्र उपाय है?

तू है , इसका मुझे शक है
तू ना है, इसका मुझे यकीन

तू ही बता
अब तेरा मैं क्या करू?

Monday, February 11, 2013

Sometimes..

Sometimes, in my nights
I want to hold you tight
But with opened eyes
I can't have your sight

Sometimes during the day
With you I want to walk the way
But within my fist
I've nothing but sun rays

Sometimes in the evenings
With you I want to enjoy the swings
But when I stop to see you
There are nothing but empty things

Sometimes I wonder why?
Why I feel shy?
To tell thy
Things i want to cry!!!!!

Wednesday, February 6, 2013

एक प्याली चाय की..


एक प्याली चाय  थी
कुछ जाने पहचाने लोग थे
कुछ बीती बातें थी
वही पसंदीदा ठिकाना था
और मैं थी
क्या मैं ही थी ?
अत्यंत शांत, मंद व स्थिर
क्या मैं ही थी ?
सदैव वाद-विवाद मे उलझने वाली
सभी के ताल मे ताल मिलाने वाली
क्या मैं ही थी ?
महज़ एक श्रोता बन कर बैठी थी
कभी राजनीति, कभी रिश्ते तो कभी समाज की बातें
कभी धन दौलत, कभी मनोरंजक तो कभी अभिमान की बातें
जीतने प्रकार के लोग, उतनी प्रकार की बातें
मेरे मन मस्तिष्क मे थी ना जाने कितने ही प्रकार की बातें
मगर मैं कही और , कहीं किसी और के साथ खोई हुई थी..
ये तो वही लोग थे जिनके साथ मैं कभी ठहाके लगाया करती थी
मगर पता नही क्यू, मैं कहीं किसी ओर के साथ खोई हुई थी
वो प्याली चाय की ठंडी हो गयी
और सब अपनी अपनी राह को निकल लिए..
मैं अब भी कहीं किसी और के साथ खोई हुई थी..