Sunday, January 6, 2013

ये कहाँ आ गया हू मैं ....


ये कौन सी जगह है
ये कौन सा देश है
ये कौन सी भाषा है
ये कौन से लोग है

कितने अपरिचित लोग है
कितने अद्भुत रंग है
ना जाने कितने ही प्रकार है
पर कोई भी ना संग है

कितना विशाल समाज है
कितने ही मशहूर लोग है
कितनो के ह्रदय मे प्रेम है
कितनो के मन मे द्वेष है

एक मैं यहाँ अकेला हू
उसके प्रेम से लबालब भरा हुआ
पूरी तरह सनतुष्ट, आनंद मगन
रंगो मे डूबा हुआ

अचानक कुछ ऐसा हुआ
सब कुछ जैसे सहम गया
मुस्कराहटें धुंधली हो गयी
घुटन सी होने लगी


अभी सब सुहावना था
हुआ क्या अचानक

ये हलचल तो मेरे भीतर थी
चीखें तो मेरे मन की थी
कुछ कहना था उसे
कुछ समझाना था मुझे

दिल ओर दिमाग़ के बीच
ये कैसी शत्रुता थी

मैं समझ गया
मैं संभल गया
मैने सुन लिया
और मैं बदल गया...

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