Monday, November 4, 2013

एक एहसास

एक एहसास हू मैं
एहसास ही बनाए रखना मुझको
एक प्रकाश हू मैं
आखों से लगाए रखना मुझको

आए जो आखों मे आसू मेरे
सीने से लगाना मुझको
आए जो लफ्ज़ होठों पे मेरे
कभी मत दबाना उनको

महफ़िल मे अगर शरम आती है तुम्हे
इशारो से बाहर बुलाना मुझको
गीली मिट्टी की दीवार हू मैं
कभी मत टूटने देना मुझको

आएँगे तुम्हारे सामने मोड़ कई
होंगे वाहा लोग नये
होंगी वाहा नई रंगीनीया
हाथ ज़ोर के विनती करती हूँ में आज


यू अकेला रोता हुआ ना छोर जाना मुझको..