Thursday, November 15, 2012

क्यू !!!!





क्यू इतना प्यार करू मैं
क्यू दिल को तस्सली दू मैं
क्यू कहु मैं दिल से, की तू ग़लत नही है
क्यू न चुप रहू मैं
क्यू इतनी विवश हू मैं
क्यू कह के भी न कह ना पाई मैं
क्यू अपना प्यार ना बयान कर पाई मैं
क्यू खुश रहती हू मैं
क्यू बे इंतेहा मोहब्बत है मुझे उससे
क्यू मैं उसकी आखों की गहराई मे खो सी जाती हू
क्यू मैं उसकी एक मुस्कुराह्ट को देख, अपना दर्द भूल जाती हू,
क्यू इस आंजान से देश मे बस वो ही अपना सा लगता है
क्यू उसकी आहट सुनते ही खुश हो जाती हू
क्यू उसे महसूस करने की भरसक कोशिश करती हू
क्यू उसकी बातों मे खुद को तलाश करती हू
क्यू उसका स्पर्श मोहित कर जाता है
क्यू उसके लिए कुछ कर गुजरने का दिल करता है
क्यू वो मुझे इतना चाहता है
ये सच या फिर एक सपना
अगर सपना, तो काश मेरी ये आखें कभी ना खुले